आज दिनाँक 18-10-2015 को पाँचवे नवरात्र है माँ के पाँचवे स्वरूप स्कंदमाता
कहते हैं यह त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदर स्थित हैं ।
इनकी अराधना करने जीवन पाप कर्मों अन्त होता हैं । भगवान स्कन्द बालरूप में
इनकी गोद में विराजते है इसलिए इनका नाम स्कंदमाता पड़ा है । जो भक्त
स्कन्दमाता की भक्ति करते हैं वह मन से सँसार बन्धन मोहजाल से दूर रहते है ।
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